LPG Gas Price Today – देशभर में रसोई गैस यानी एलपीजी सिलेंडर के दामों में एक बार फिर बढ़ोतरी हुई है। इस वृद्धि ने आम परिवारों के मासिक बजट पर सीधा असर डाला है। महानगरों से लेकर छोटे शहरों तक हर जगह गृहिणियों और व्यापारियों की चिंता बढ़ गई है।
क्यों महंगी हुई रसोई गैस?
गैस की बढ़ी हुई कीमतों की जड़ें भारत से बाहर हैं। दरअसल, पश्चिम एशिया यानी मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के चलते समुद्री मार्गों पर असर पड़ा है। खासतौर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज — जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल और गैस मार्गों में से एक है — पर जोखिम बढ़ने से जहाजों को लंबे वैकल्पिक रास्ते अपनाने पड़ रहे हैं। इससे परिवहन लागत में तेज उछाल आया है। साथ ही, युद्ध जोखिम बीमा (वॉर-रिस्क इंश्योरेंस) भी महंगा हो गया है, जिसका बोझ अंततः उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है।
गौरतलब है कि भारत अपनी कुल एलपीजी जरूरत का करीब 60 प्रतिशत विदेशों से आयात करता है, जिसमें सबसे बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाली हर हलचल सीधे भारतीय उपभोक्ताओं की जेब पर असर करती है।
प्रमुख शहरों में आज का एलपीजी भाव
🏠 घरेलू सिलेंडर (14.2 किलोग्राम)
| शहर | कीमत (₹) |
|---|---|
| नई दिल्ली | ₹913.00 |
| मुंबई | ₹912.50 |
| बेंगलुरु | ₹915.50 |
| कोलकाता | ₹939.00 |
| लखनऊ | ₹950.50 |
| हैदराबाद | ₹965.00 |
| पटना | ₹1002.50 |
🏪 कमर्शियल सिलेंडर (19 किलोग्राम)
| शहर | कीमत (₹) |
|---|---|
| मुंबई | ₹1836.00 |
| नई दिल्ली | ₹1884.50 |
| बेंगलुरु | ₹1958.00 |
| कोलकाता | ₹1988.50 |
| लखनऊ | ₹2007.00 |
| हैदराबाद | ₹2105.50 |
| पटना | ₹2133.50 |
ताजा संशोधन में घरेलू सिलेंडर पर करीब ₹60 और कमर्शियल सिलेंडर पर ₹144 तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
आम जनता और व्यवसायों पर क्या पड़ेगा असर?
गैस के दाम बढ़ने का असर केवल रसोई तक सीमित नहीं रहता। इसकी मार पूरी अर्थव्यवस्था पर पड़ती है। परिवारों का मासिक खर्च बढ़ेगा और घर के बजट में फेरबदल करना पड़ सकता है। होटल, ढाबे और रेस्टोरेंट चलाने वालों की उत्पादन लागत बढ़ेगी, जिसका असर खाने-पीने की चीजों के दामों पर भी दिख सकता है। छोटे और मझोले उद्यमियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ने की आशंका है। अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रही, तो इसका असर महंगाई दर में भी देखने को मिल सकता है।
सरकार ने उठाए ये कदम
केंद्र सरकार स्थिति की गंभीरता को समझते हुए कई मोर्चों पर सक्रिय हुई है। देश में एलपीजी उत्पादन में लगभग 10 प्रतिशत की वृद्धि का निर्णय लिया गया है। खाड़ी देशों पर निर्भरता कम करने के लिए अमेरिका और रूस जैसे वैकल्पिक स्रोतों से आपूर्ति बढ़ाने पर बातचीत जारी है। इसके अलावा, सप्लाई चेन को अधिक सुदृढ़ और विविधतापूर्ण बनाने की दिशा में भी काम किया जा रहा है ताकि भविष्य में ऐसे झटकों से बचा जा सके।
आगे क्या होगा गैस की कीमतों का?
विशेषज्ञों की राय में आने वाले कुछ सप्ताह बेहद निर्णायक साबित होंगे। यदि मिडिल ईस्ट में तनाव कम होता है और समुद्री मार्ग सुचारू होते हैं, तो कीमतों में कमी आ सकती है। लेकिन अगर अंतरराष्ट्रीय हालात जस के तस बने रहे, तो राहत मिलने की उम्मीद फिलहाल कम दिखती है। बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहने की आशंका बनी हुई है।
एलपीजी की मौजूदा महंगाई एक वैश्विक संकट का घरेलू प्रतिबिंब है। अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीति और आपूर्ति श्रृंखला की अनिश्चितता के चलते कीमतों पर दबाव बना हुआ है। ऐसे में जरूरी है कि आप अपने घरेलू खर्चों की योजना समझदारी से बनाएं और गैस की बर्बादी से बचें। सरकार की कोशिशों के साथ-साथ उपभोक्ताओं की सजगता भी इस दौर में काम आएगी।








